बाढ़ राहत शिविरों में मंजूषा कला के रंगों से सकारात्मक ऊर्जा का संचार*

 

भागलपुर जिले में भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए जिला प्रशासन, भागलपुर की ओर से विभिन्न स्थानों पर बाढ़ राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है। इन शिविरों में प्रभावित परिवारों को आश्रय, भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके मानसिक संबल और रचनात्मक अभिव्यक्ति का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

इसी क्रम में जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय, भागलपुर की ओर से राहत शिविरों में प्रतिदिन मंजूषा कला प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों को आर्ट थेरेपी के एक माध्यम के रूप में संचालित किया जा रहा है, ताकि बाढ़ की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे बच्चों एवं परिवारों को रचनात्मक वातावरण मिल सके।

मंजूषा कला के प्रशिक्षण के दौरान बाढ़ पीड़ित बच्चों को अंग क्षेत्र की पारंपरिक लोक कला, बिहुला-विषहरी की लोकगाथा तथा मंजूषा चित्रकला की विविध विशेषताओं से परिचित कराया जा रहा है। बच्चे रंगों और रेखाओं के माध्यम से अपनी कल्पनाओं को कागज पर उकेर रहे हैं। वहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से गीत, संगीत एवं अन्य कलात्मक प्रस्तुतियों का आयोजन भी किया जा रहा है।

अंग क्षेत्र की इस पारंपरिक लोक कला से जुड़कर बाढ़ प्रभावित परिवारों में सकारात्मक ऊर्जा एवं उत्साह का संचार स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। कठिन परिस्थितियों के बीच कला बच्चों को अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने तथा तनाव से उबरने का सहज अवसर प्रदान कर रही है।

आज माननीय मुख्यमंत्री, बिहार श्री सम्राट चौधरी एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राहत शिविर में आयोजित मंजूषा कला कार्यशाला का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए जा रहे मंजूषा चित्रों को देखा तथा इस रचनात्मक पहल की जानकारी प्राप्त की।

जिला पदाधिकारी भागलपुर श्रीमती अलंकृता पाण्डेय के नेतृत्व में यह पहल आपदा की घड़ी में राहत कार्यों को मानवीय संवेदनाओं, कला और संस्कृति से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। इसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक कला एवं संस्कृति की पहुंच सुनिश्चित करना तथा अंग क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ना है।

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