भागलपुर | भारत लेनिन अमर शहीद जगदेव प्रसाद जी के शहादत दिवस के अवसर पर रविवार, 20 सितंबर 2026 को प्रातः 11 बजे से हॉली मॉडल पब्लिक स्कूल, सिल्क सिटी बसंतपुर चौक पेट्रोल पंप के पास, हॉली मॉडल स्कूल परिसर, तिलका मांझी बाईपास, भागलपुर में नागरिक समाज, भागलपुर की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि nagmani कुशवाहा, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, जगदेव सेना थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नागरिक समाज, भागलपुर के जिला अध्यक्ष निर्मल कुमार पासवान ने की तथा मंच संचालन भी उनके द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में शोषित समाज दल, भागलपुर के जिला संयोजक निखिलेश कुमार, फुले-अंबेडकर जागृति संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार, कुशवाहा की गरिमा संघ, भागलपुर के पीरपैंती प्रखंड अध्यक्ष सुभाष कुशवाहा, कहलगांव प्रखंड अध्यक्ष चंदन सिंह, अवध किशोर, गोराडीह से बिहारी जी, घोघा से रामदयालु सिंह, सबौर आर्य टोला से चंद्रहास सिंह, नाथनगर से मोहम्मद उमर फारूक, जगदीशपुर से छोटे तांती, सन्हौला भूरिया से बलराम सिंह उर्फ बुलबुल, कमलपुर से मुकेश सिंह सहित सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक साथी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभी उपस्थित लोगों ने जगदेव प्रसाद जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके जीवन, संघर्ष तथा सामाजिक न्याय के विचारों को याद किया।
इस अवसर पर शोषित समाज दल, भागलपुर के जिला संयोजक निखिलेश कुमार ने कहा कि शोषित समाज दल के संस्थापक महामंत्री सह अर्जक संघ के प्रणेता भारत लेनिन अमर शहीद जगदेव प्रसाद जी ने सामाजिक बराबरी, राजनीतिक भागीदारी और शोषित-वंचित समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनकी राजनीतिक विरासत शोषित समाज दल और सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में अर्जक आंदोलन से जुड़ी रही। प्रकाशित ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार 5 सितंबर 1974 को कुर्था प्रखंड कार्यालय के समक्ष शोषित समाज दल के आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से जगदेव प्रसाद शहीद हुए।
निखिलेश कुमार ने कहा कि जगदेव बाबू की शहादत को केवल स्मरण करने के बजाय उनके विचारों—सामाजिक न्याय, समानता, सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी—पर गंभीर चर्चा करना आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि भागलपुर जिले में इस वर्ष जगदेव प्रसाद जी के शहादत दिवस के अवसर पर विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह जगदेव बाबू के जीवन और विचारों के प्रति बढ़ती सामाजिक रुचि का संकेत है।
