झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के बाद छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि पुलिस की कार्रवाई से उनका आंदोलन कमजोर होने के बजाय और तेज होगा। छात्रों का आरोप है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे और सरकार से बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन देर रात पुलिस की कार्रवाई ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के विधायक जयराम कुमार महतो ने भी पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दिनभर का आंदोलन ऐतिहासिक रहा और शाम तक प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन रात में झारखंड पुलिस ने ऐसी कार्रवाई की, जिससे पुलिस बल की साख को नुकसान पहुंचा है। जयराम महतो ने आरोप लगाया कि अंधेरे की आड़ में और लाइटें बंद करके पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बातचीत का भरोसा दिलाया।
उनके मुताबिक, छात्र इसी उम्मीद में वहां बैठे रहे कि उनकी मांगों और समस्याओं पर सरकार या प्रशासन के साथ सार्थक बातचीत होगी, लेकिन बातचीत के बजाय पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। उन्होंने इस कार्रवाई को बर्बर हमला करार देते हुए इसकी आलोचना की। जयराम कुमार महतो ने विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला प्रदर्शनकारियों पर पुरुष पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई की और मौके पर उन्हें संभालने के लिए महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं थीं। इस घटना के बाद छात्रों और आंदोलनकारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भर्ती से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
उनका आरोप है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए। वहीं, जयराम महतो ने कहा कि जल्द ही आगे की रणनीति को लेकर फैसला लिया जाएगा और वे उस फैसले का समर्थन करेंगे। उन्होंने आंदोलन के दौरान एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी अब तक एकजुट रहे हैं और भविष्य में भी एकजुट रहेंगे। लाठीचार्ज के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन और सरकार के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और आंदोलनकारी अपनी अगली रणनीति के तहत क्या फैसला लेते हैं।
