*बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा, प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने तथा भविष्य में बाढ़ से बचाव के स्थायी उपायों पर हुई चर्चा*

*बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा, प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने तथा भविष्य में बाढ़ से बचाव के स्थायी उपायों पर हुई चर्चा*

भागलपुर। समीक्षा भवन, भागलपुर में श्री नीतीश मिश्रा, माननीय प्रभारी मंत्री, भागलपुर (नगर विकास एवं आवास विभाग तथा सूचना प्रावैधिकी विभाग) की उपस्थिति में जिले में बाढ़ से उत्पन्न स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों, प्रभावित परिवारों को अनुग्रह अनुदान (जीआर) एवं कृषि इनपुट अनुदान के भुगतान तथा गंगा नदी के कटाव से उत्पन्न समस्याओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, जिला पदाधिकारी, एनडीए जिला अध्यक्ष, वरीय पदाधिकारियों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर सभी को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं भी दी गईं।

बैठक में अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन, भागलपुर) द्वारा बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों, संचालित राहत कार्यों, उपलब्ध कराई गई सुविधाओं तथा अनुदान वितरण की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया गया।

1. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों एवं राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा

समीक्षा के दौरान बताया गया कि इस वर्ष भागलपुर जिले के कुल 15 अंचलों की 114 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुईं। बाढ़ से कुल 457 गांव एवं 906 वार्ड प्रभावित हुए। उपलब्ध प्रतिवेदन के अनुसार, कुल 9,44,891 की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई।

प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक व्यवस्था की गई। इसके तहत कुल 129 नावों का परिचालन कराया गया, जिसमें नारायणपुर क्षेत्र में एक मोटर बोट भी संचालित की गई। प्रभावित परिवारों के बीच 29,119 पॉलिथीन शीट का वितरण किया गया।

बाढ़ प्रभावित लोगों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में कुल 342 सामुदायिक रसोई संचालित की गईं। इनके माध्यम से कुल 69,74,491 बार बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराया गया। इसके अतिरिक्त, प्रभावित क्षेत्रों में 115 स्वास्थ्य शिविर लगाए गए, जिनसे 80,334 परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिला।

कृषि एवं पशुधन की सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्था की गई। बाढ़ से 74,401 फसल इकाइयां प्रभावित हुईं तथा पशुपालकों के बीच कुल 1,258.77 क्विंटल पशुचारा वितरित किया गया।

2. भागलपुर सदर में बाढ़ राहत शिविरों का संचालन

भागलपुर सदर क्षेत्र में कुल 7 बाढ़ राहत शिविर संचालित किए गए। इन शिविरों में 2,251 परिवारों के कुल 9,003 लोगों को आश्रय उपलब्ध कराया गया।

राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के लिए शौचालय, स्नानघर, पेयजल एवं पानी के टैंकर सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अतिरिक्त, शिविर में आश्रय लेने वाले परिवारों के बीच बर्तन एवं वस्त्र किट का भी वितरण किया गया।

राहत शिविरों में जन्म लेने वाले तीन नवजात बच्चों (दो लड़के एवं एक लड़की) के परिवारों को मुख्यमंत्री सहायता के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। इनमें लड़की के जन्म पर 15,000 रुपये तथा दोनों लड़कों के जन्म पर 10-10 हजार रुपये की दर से कुल 35,000 रुपये का चेक माननीय मुख्यमंत्री के कर-कमलों द्वारा वितरित किया गया।

शिविरों में चार वर्ष तक के बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए दूध एवं बिस्कुट की व्यवस्था की गई। इसके तहत कुल 1,857 लीटर दूध एवं 8,729 पैकेट बिस्कुट वितरित किए गए। राहत शिविरों में भोजन करने वाले लोगों की कुल संख्या 2,33,859 दर्ज की गई।

3. भागलपुर नगर निगम क्षेत्र में सामुदायिक रसोई का संचालन

बैठक में बताया गया कि भागलपुर नगर निगम क्षेत्र में वर्ष 2016 के बाद पहली बार वर्ष 2026 में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई संचालित की गई। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 3, 4, 19 एवं 21 में कुल चार स्थानों पर सामुदायिक रसोई का संचालन किया गया। इसके माध्यम से बाढ़ पीड़ितों को कुल 6,290 बार भोजन उपलब्ध कराया गया।

4. गंगा नदी के कटाव से प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों की स्थिति

गंगा नदी में हुए भीषण कटाव के कारण जिले में कुल 12 मकान नदी में विलीन हो गए। इनमें 10 पक्के एवं 2 कच्चे मकान शामिल हैं। समीक्षा के दौरान बताया गया कि इन सभी 12 प्रभावित परिवारों के पास अपनी भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रशासन द्वारा कुल 65 डिसमिल भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। संबंधित परिवारों को शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

कटाव के कारण विस्थापित हुए परिवारों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2026 तक सामुदायिक रसोई संचालित की गई। इसके माध्यम से कुल 46,940 पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराया गया।

5. एनडीआरएफ एवं आपदा मित्रों की तैनाती

आपदा की स्थिति में त्वरित बचाव एवं राहत कार्य सुनिश्चित करने के लिए जिले में एनडीआरएफ एवं अन्य आपदा बचाव दलों की तैनाती की गई है।

बैठक में उपलब्ध कराए गए प्रतिवेदन के अनुसार जिले में कुल 5 टीमें, 15 मोटर बोट एवं 51 जवान तैनात हैं। इसके अतिरिक्त 3 डीप डाइवर, 261 गोताखोर तथा 501 आपदा मित्र भी उपलब्ध हैं। बचाव कार्यों के लिए कुल 500 लाइफ जैकेट उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। प्रतिवेदन में दो मोटर बोट के खराब होने की स्थिति से भी अवगत कराया गया।

पॉलिथीन शीट की उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पूर्व में 23,672 पॉलिथीन शीट उपलब्ध थीं। इसके अतिरिक्त 24,735 पॉलिथीन शीट प्राप्त हुईं। इस प्रकार कुल 48,377 पॉलिथीन शीट उपलब्ध हुईं, जिनमें से 30,576 का वितरण किया जा चुका है तथा 17,801 पॉलिथीन शीट शेष स्टॉक में उपलब्ध हैं।

6. मानव क्षति एवं अनुग्रह अनुदान भुगतान की स्थिति

मानव क्षति से संबंधित मामलों की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि दिनांक 26 अगस्त को गंगा नदी में हुई दुर्घटनाओं के दौरान दो व्यक्ति बादल कुमार एवं सिकंदर मंडल लापता हो गए थे। एनडीआरएफ की टीम द्वारा लगातार चार दिनों तक खोजबीन की गई, लेकिन दोनों व्यक्तियों का शव बरामद नहीं हो सका।

इसके बाद नियमानुसार समाचार पत्र में सूचना प्रकाशित कराई गई तथा एक माह की निर्धारित प्रतीक्षा अवधि पूरी होने के उपरांत कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा जांच की गई। जांच प्रतिवेदन संतोषजनक पाए जाने के बाद दोनों लापता व्यक्तियों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह अनुदान राशि का भुगतान दिनांक 7 अक्टूबर 2026 को कर दिया गया।

7. बाढ़ प्रभावित परिवारों को जीआर राशि का भुगतान

बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा निर्धारित 7,000 रुपये प्रति परिवार की दर से अनुग्रह अनुदान (जीआर) राशि का भुगतान किया गया।

बैठक में बताया गया कि प्रथम चरण में 1,39,266 परिवारों को तथा द्वितीय चरण में पूर्व में छूटे हुए 26,553 परिवारों को राशि हस्तांतरित की गई। इस प्रकार जिले में कुल 1,65,819 परिवारों को 7,000 रुपये प्रति परिवार की दर से जीआर राशि उपलब्ध कराई गई है।

विशेष रूप से भागलपुर नगर निगम क्षेत्र में वर्ष 2016 के बाद पहली बार इस वर्ष बाढ़ प्रभावित 1,150 परिवारों को जीआर राशि का लाभ दिया गया है।

8. किसानों को कृषि इनपुट अनुदान का भुगतान

बाढ़ से प्रभावित किसानों को फसल क्षति के मद्देनजर कृषि इनपुट अनुदान उपलब्ध कराने की कार्रवाई की गई। समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले के कुल 74,399 किसानों को कृषि इनपुट अनुदान के रूप में 27 करोड़ 37 लाख 8 हजार 364 रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।

बैठक में यह भी बताया गया कि जीआर राशि एवं कृषि इनपुट अनुदान के भुगतान के मामले में भागलपुर जिला पूरे बिहार में शीर्ष स्थान पर है।

9. बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मती एवं स्वच्छता संबंधी व्यवस्था

बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मती की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में कुल 10 सड़कों, जिनकी कुल लंबाई 1,883 मीटर है, का मरम्मतीकरण कार्य संतोषजनक ढंग से पूरा कर लिया गया है।

इसके अतिरिक्त, प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण एवं जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर का वितरण एवं छिड़काव तथा क्लोरीन टैबलेट उपलब्ध कराने की कार्रवाई निरंतर जारी है।

10. संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश एवं भविष्य की तैयारी

बैठक में राहत एवं बचाव कार्यों से जुड़े सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया। विशेष रूप से संबंधित वेंडर्स एवं एजेंसियों के लंबित भुगतान का समय पर निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि किसी प्रकार का भुगतान बैकलॉग शेष नहीं रहे और राहत कार्यों के संचालन में बाधा उत्पन्न न हो।

भविष्य में बाढ़ एवं कटाव से होने वाली क्षति को कम करने के उद्देश्य से स्थायी समाधान की दिशा में भी विस्तार से चर्चा की गई। इसके तहत जिले में स्थायी तटबंधों की मैपिंग कराने, एम्बैंकमेंट्स (तटबंधों) की विस्तृत स्टडी करने तथा जल संसाधन विभाग के अभिलेखों में छूटे हुए बांधों एवं तटबंधों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

इस संबंध में संबंधित विभागों को उपलब्ध अभिलेखों का सम्यक अध्ययन करते हुए आवश्यक समन्वय स्थापित करने तथा भविष्य में आपदा की स्थिति से निपटने के लिए दीर्घकालिक एवं स्थायी कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में पहल करने को कहा गया।

बैठक में बाढ़ प्रभावित परिवारों को समयबद्ध राहत उपलब्ध कराने, अनुदान राशि का पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित करने, विस्थापित परिवारों के पुनर्वास तथा भविष्य में बाढ़ एवं गंगा कटाव से होने वाली क्षति को न्यूनतम करने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित एवं प्रभावी ढंग से कार्य करने पर जोर दिया गया।

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