भागलपुर। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार तथा जिला प्रशासन, भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय बिहुला विषहरी उत्सव का आज भव्य एवं सफल समापन हुआ। उत्सव के दौरान लोककला, फोटोग्राफी, चित्रकला एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अंग क्षेत्र की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप प्रदान किया गया।
उत्सव के समापन दिवस पर विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन द्वारा संयोजित एवं उनके द्वारा खींची गई तस्वीरों पर आधारित एकल फोटोग्राफी प्रदर्शनी ‘दृष्टिकोण’ का आयोजन भागलपुर संग्रहालय में किया गया। प्रदर्शनी में मानव जीवन के विविध आयामों, देश के विभिन्न हिस्सों की संस्कृतियों, लोगों के चेहरे तथा उनके दैनिक जीवन से जुड़े भावनात्मक और सामाजिक पहलुओं को कैमरे के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी को देखने के लिए जिले के कलाकार, छायाचित्रकार, कला प्रेमी एवं संस्कृति से जुड़े अनेक लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर छायाचित्रकारों ने एक-दूसरे को विश्व फोटोग्राफी दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
बिहुला विषहरी उत्सव की श्रृंखला में दो दिवसीय मंजूषा चित्रकला कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। प्रशिक्षक डॉ. उलूपी झा ने 30 से अधिक प्रतिभागियों को मंजूषा लोककला की पारंपरिक शैली, उसके स्वरूप, विषय-वस्तु एवं चित्रांकन की बारीकियों से अवगत कराया। इसके साथ ही मंजूषा हटिया के अंतर्गत मंजूषा लोककला की समूह प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें अनेक कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन किया। समापन अवसर पर प्रतिभागी कलाकारों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक संध्या में वरिष्ठ लोक कलाकार राजेश झा द्वारा बिहुला विषहरी की लोकगाथा पर आधारित भगतेन लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और कलाकारों को खूब तालियां मिलीं। इसके पश्चात कृष्ण क्लब द्वारा बिहुला विषहरी की लोकगाथा पर आधारित लोकनाट्य प्रस्तुत किया गया। अजय अटल के नेतृत्व में शीतांशु अरुण, निवास मोदी, मनोज कुमार एवं अन्य कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय एवं प्रस्तुति के माध्यम से लोकगाथा के विभिन्न प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने उत्सव में भाग लेने वाले प्रतिभागियों एवं कलाकारों को प्रमाण-पत्र, अंगवस्त्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी लोक परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं।
दो दिवसीय बिहुला विषहरी उत्सव में फोटोग्राफी प्रदर्शनी, मंजूषा चित्रकला कार्यशाला, मंजूषा हटिया तथा लोकनृत्य एवं लोकनाट्य की प्रस्तुतियों ने भागलपुर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उत्सव का समापन कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों के सम्मान के संकल्प के साथ हुआ।
